Sunday, 29 December 2013

उत्तर

पिछले प्रकरण में हमने प्रश्नो पर चर्चा करी थी, और फल स्वरूप मुझे कई प्रश्नो कि वर्षा से गुजरना पड़ा।
जहां ज्यादातर प्रश्नो के उत्तर मैंने e-mail द्वारा  दे दिए हैं, कुछ प्रश्नो के  उत्तर में यहा देना चाहूंगा।
और हाँ कृपया अपने प्रश्न मुझे e-mail द्वारा न भेजकर  निचे comment करें ताकि सब उसका लाभ उठा सके

१) It's a really good blog but google translation is not working well can you please write the posts in english(or translate them)so that those who can't understand hindi properly can understand the posts(-Akhilesh Jain )

Actually when I started the blog it was ment to be in english only that's why the name"Inner circle" but the thing is that I m not very good in english and also writting the blog in english makes problem to a lot of others who would rather read hindi for indian mythology. I m still Considering to translate in english and that's why I m Searching for Someone who will do it. If You would like to help then Plz send me a mail at Sanchit.dr.Bhandari@gmail.com

Also as soon as we achieve 2000 page view or 50 followers I would start posting chapters of "Essence of Bible-The Gods Love" and that will be in english

२)बहुत अच्छा लिखा है, पर इस बात का ज़िकर नहीं है कि जो व्यक्ति हमारे भीतर छिपा है उसे हम कैसे प्राप्त करें ?(Dr Veena Sharma)

 दरअसल इस प्रश्न का उत्तर बहुत ही मुश्किल है और एक बार में इसे समझ जाना लगभग न मुमकिन परन्तु में आशा करता हूँ कि जब तक में अपने द्वारा रचित 45 अध्याय ख़तम करूँगा आप इस का अर्थ समझ जायेंगे


३) बकवास  समय बर्बाद करने वाली बात है आखिर क्यूँ कोई संस्कृति को जाने ये सिर्फ लोगो को बेवकूफ बनाने के लिए है हिन्दू सब्यता है ही ……  मुझे ये बताओ कि जिस राम ने अग्नि परीक्षा के बाद भी सीता तो त्याग दियो वो महान कैसे ?(Annonymus)

इस mail  में कई ऐसे शब्द थे, जो में यहा नहीं लिख सकता।  फिर भी मैंने सोचा कि इसका जवाब देना जरूरी हैं।
सर्व प्रथम तो में ये कहना चाहूंगा कि यदि आपको लगता हैं कि संस्कृति बेकार कि चीज़ है तो आप ने क्यूँ मेरा blog पढ़ा और क्यूँ मुझे mail भेजा ?ऐसा करके अपने ये साबित कर दिया कि आप भी मानते हैं कि जीवन कि समस्यायों का हल केवल संकृति द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।  परन्तु आप उसे समझ नहीं पा रहे और इसी लिए क्रोध कर रहे हैं।  आपने प्रभु श्री राम के विषय में जो प्रशन किया है वो उत्तम है और इसका उत्तर आपको 4  अध्याय "धरम: संकट और पालन " में मिलेगा परन्तु साथ में यह भी याद रखें कि श्री राम कि आराधना ही संस्कृति नहीं। हैं क्यूंकि भारतीये संकृति आत्मा और परमात्मा पर निर्भर हैं जिसका विश्लेषण  रामचरित्र मानस में सगुन और निर्गुण ईश्वर के  रूप में तुलसीदास जी ने किया है।  ये चर्चा 4  अध्याय के लिए है

४ )में इस blog  को follow करती हूँ पर अभी तक इस पे बहुत  ही कम post हैं और काफी समय से कोई पोस्ट भी नहीं ऐसा क्यूँ हैं?(-Pooja Naik)

यह प्रश्न मुझे कल मिला और मैंने सोचा कि हाँ बात तो सही है।  दरअसल ये Blog उन 45 अद्याय पर आधारित हैं जो मेरी dairy में दर्ज हैं पर समय के आभाव के कारन में उन्हें Internet  पर छोड़ नहीं पा रहा . ज्यादातर बातें आप ज़िंदगी से प्रभावित है और सबसे बड़ा योगदान T.V Show उपनिषद गंगा का हैं  . कम लिखने कि एक वजह ये भी हैं कि मुझे लगता था, इन्हें कोई पढता नहीं हैं पर पिछले अध्याय के बाद आए 67 mail  नै मुझे गलत साबित कर दिया , अब में प्रयास करूँगा कि हर हफ्ते एक पोस्ट जरूर लिखूं

५) यदि ईश्वर नें हमें रचा ह तो उसने हमें इतने दुःख क्यूँ दिए?

यह प्रशन एक चर्चा के समय, मुझे एक करीबी  नें पूछा था और इसका उत्तर ही हमारे अगले अध्याय का मूल हैं जिसका नाम हैं आनंद स्वरूप  जो कि में आज अन्यथा अगले रविवार को अवश्य Post कर दूंगा .

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